Culture

Why Cows are Important to Hindus

“गावो विश्वस्य मातर:”

कहते हैं कि जो गौमाता के खुर से उड़ी हुई धूलि को सिर पर धारण करता है, वह मानों तीर्थ के जल में स्नान कर लेता है और सभी पापों से छुटकारा पा जाता है । पशुओं में बकरी, भेड़, ऊंटनी, भैंस का दूध भी काफी महत्व रखता है। किंतु केवल दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के कारण भैंस प्रजाति को ही प्रोत्साहन मिला है, क्योंकि यह दूध अधिक देती है व वसा की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे घी अधिक मात्रा में प्राप्त होता है।

गाय का दूध गुणात्मक दृष्टि से अच्छा होने के बावजूद कम मात्रा में प्राप्त होता है। दूध अधिक मिले इसके लिए कुछ लोग गाय और भैंस का दूध क्रूर और अमानवीय तरीके से निकालते हैं। गाय का दूध निकालने से पहले यदि बछड़ा/बछिया हो तो पहले उसे पिलाया जाना चाहिए। वर्तमान में लोग बछड़े/बछिया का हक कम करते है। साथ ही इंजेक्शन देकर दूध बढ़ाने का प्रयत्न करते हैं, जो की उचित नहीं है।
प्राचीन ग्रंथों में सुरभि (इंद्र के पास), कामधेनु (समुद्र मंथन के 14 रत्नों में एक), पदमा, कपिला आदि गायों महत्व बताया है। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभ देवजी ने असि, मसि व कृषि गौ वंश को साथ लेकर मनुष्य को सिखाए। हमारा पूरा जीवन गाय पर आधारित है। शिव मंदिर में काली गाय के दर्शन मात्र से काल सर्प योग निवारण हो जाता है।

What is the significance of cows in Hinduism

गाय के पीछे के पैरों के खुरों के दर्शन करने मात्र से कभी अकाल मृत्यु नहीं होती है। गाय की प्रदक्षिणा करने से चारों धाम के दर्शन लाभ प्राप्त होता है, क्योंकि गाय के पैरों चार धाम है। जिस प्रकार पीपल का वृक्ष एवं तुलसी का पौधा आक्सीजन छोड़ते है। एक छोटा चम्मच देसी गाय का घी जलते हुए कंडे पर डाला जाए तो एक टन ऑक्सीजन बनती है। इसलिए हमारे यहां यज्ञ हवन अग्नि -होम में गाय का ही घी उपयोग में लिया जाता है। प्रदूषण को दूर करने का इससे अच्छा और कोई साधन नहीं है।

धार्मिक ग्रंथों में लिखा है “गावो विश्वस्य मातर:” अर्थात गाय विश्व की माता है। गौ माता की रीढ़ की हड्डी में सूर्य नाड़ी एवं केतुनाड़ी साथ हुआ करती है, गौमाता जब धुप में निकलती है तो सूर्य का प्रकाश गौमाता की रीढ़ हड्डी पर पड़ने से घर्षण द्धारा केरोटिन नाम का पदार्थ बनता है जिसे स्वर्णक्षार कहते हैं। यह पदार्थ नीचे आकर दूध में मिलकर उसे हल्का पीला बनाता है। इसी कारण गाय का दूध हल्का पीला नजर आता है। इसे पीने से बुद्धि का तीव्र विकास होता है। जब हम किसी अत्यंत अनिवार्य कार्य से बाहर जा रहे हों और सामने गाय माता के इस प्रकार दर्शन हो की वह अपने बछड़े या बछिया को दूध पिला रही हो तो हमें समझ जाना चाहिए की जिस काम के लिए हम निकले हैं वह कार्य अब निश्चित ही पूर्ण होगा।

गौ माता का जंगल से घर वापस लौटने का संध्या का समय (गोधूलि वेला) अत्यंत शुभ एवं पवित्र है। गाय का मूत्र गो औषधि है। मां शब्द की उत्पत्ति गौ मुख से हुई है। मानव समाज में भी मां शब्द कहना गाय से सीखा है। जब गौ वत्स रंभाता है तो मां शब्द गुंजायमान होता है। गौ-शाला में बैठकर किए गए यज्ञ हवन ,जप-तप का फल कई गुना मिलता है। बच्चों को नजर लग जाने पर, गौ माता की पूंछ से बच्चों को झाड़े जाने से नजर उत्तर जाती है, इसका उदाहरण ग्रंथों में भी पढ़ने को मिलता है, जब पूतना उद्धार में भगवान कृष्ण को नजर लग जाने पर गाय की पूंछ से नजर उतारी गई।

गौ के गोबर से लीपने पर स्थान पवित्र होता है। गौ-मूत्र का पवन ग्रंथों में अथर्ववेद, चरकसहिंता, राजतिपटु, बाण भट्ट, अमृत सागर, भाव सागर, सश्रुतु संहिता में सुंदर वर्णन किया गया है। काली गाय का दूध त्रिदोष नाशक सर्वोत्तम है। रुसी वैज्ञानिक शिरोविच ने कहा था कि गाय का दूध में रेडियो विकिरण से रक्षा करने की सर्वाधिक शक्ति होती है। गाय का दूध एक ऐसा भोजन है, जिसमें प्रोटीन कार्बोहाइड्रेड, दुग्ध, शर्करा, खनिज लवण वसा आदि मनुष्य शरीर के पोषक तत्व भरपूर पाए जाते है। गाय का दूध रसायन का करता है।

आज भी कई घरों में गाय की रोटी राखी जाती है। कई स्थानों पर संस्थाएं गौशाला बनाकर पुनीत कार्य कर रही है, जो कि प्रशंसनीय कार्य है। साथ ही यांत्रिक कत्लखानों को बंद करने का आंदोलन, मांस निर्यात नीति का पुरजोर विरोध एवं गौ रक्षा पालन संवर्धन हेतु सामाजिक धार्मिक संस्थाएं एवं सेवा भावी लोग लगातार संघर्षरत है।

दुःख इस बात का भी होता है कि लोग गाय को आवारा भटकने के लिए बाजारों में छोड़ देते है। उन्हें इनके भूख प्यास की कोई चिंता ही नहीं होती। लोगों को चाहिए की यदि गाय पालने का शौक है तो उनकी देखभाल भी आवश्यक है, क्योंकि गाय हमारी माता है एवं गौ रक्षा करना हमारा परम कर्तव्य है।

It is said that one who holds the dust on the head of the cow’s hoof, takes a bath in the water of the pilgrimage and gets rid of all sins. Cattle, sheep, cow-Camel and buffalo milk are very important in animals. But due to promoting milk production, the buffalo species have been encouraged, because it gives more milk and is more fat than the amount of ghee.

The Cow’s milk is less than a qualitative point of view. To get more milk, some people remove cow and buffalo milk, ruthless and inhumane way. Before Removing Cow’s milk, it should be given before the calf / foal should be given. Currently, people reduce the rights of the calf / foal. Along with injection, they try to increase milk, which is not fair.
In ancient books surbhi-Lrb-near Indra-RRB -, Kamdhenu-Lrb-one of the 14 gems of sea manthan-RRB -, Padma, kapila, etc. is described as cows. The first tirthankar of jain religion, Rishabh Devji, was taught to man with asi, emc and agriculture. Our whole life is based on cow. The Darshan of black cow in the shiva temple is only the duration of snake yoga.

There is never an untimely death to visit the feet behind the cow. The cow of a cow has to get the darshan of four dham, because the cow’s feet are four dham. Just as the tree of peepal and basil plants leave oxygen. A small spoon of the desi cow’s ghee is put on burning dung and a ton of oxygen is made. This is why we are in use of cow ghee in fire and home. There is no better way to remove pollution.

It is written in religious books, ” Village Viśvasya :” I. E. Cow is the mother of the world. In the spine of the mother cow’s spine, the sun is with the pulse and kētunāṛī, when the cow originates in the sun, the light of the sun is formed by friction in the spine of the mother cow, which is called svarṇakṣāra. This substance comes down in milk and makes it light yellow. That is why the cow’s milk comes light yellow. Drinking this is a rapid growth of intelligence. When we are going out of a very essential work and in front of the cow’s mother, she is feeding her calf or calf, we should understand that the work we have left is now certain. It will be.

It is very good and holy time to return home from the forest of gau mata from the jungle. Cow’s urine is medicine. The Origin of the mother is derived from the cow’s mouth. Even in human society, mother’s word has been learned from cow. When the cow is in love, then mother’s word is echoed. The sacrifice of the yagna and the sacrifice of the cow-sacrifice in the cow-school is many times. When children take a look at the tail of the cow, it is an example of the mother’s tail, and the example is to read in the books, when lord krishna has been seen from the tail of the cow when he was seen. .

The place is sacred after the dung of cow dung. The wind of cow-urine has been described in the holy books of atharvaveda, Adyghe, rājatipaṭu, Arrow Bhatt, Amrit Sagar, sense sagar, saśrutu code. Black cow’s milk is the best killer. Russian scientist śirōvica said that the cow’s milk has the highest power to defend radio radiation. The Cow’s milk is a food in which protein carbohydrates, milk, sugar, mineral salts, fat, etc. are filled with the nutrients of human body. The Cow’s milk is of chemicals.

Even today the cow’s bread is rakhi in many houses. In many places, the institutions are doing the holy work, which is appreciable work. Along with the movement to close mechanical butchers, social religious organizations and services are constantly struggling for the enrichment of the meat export policy and the enrichment of the cows.

Sadness is also that people leave the cow in the markets for stray away. They have no idea of their hunger thirst. If people want to be the hobby of the cow, their care is also necessary, because the cow is our mother and it is our ultimate duty to protect the cow.

Millions of Hindus revere and worship cows. Hinduism is a religion that raises the status of Mother to the level of Goddess. Therefore, the cow is considered a sacred animal, as it provides us life sustaining milk. … The cow is a symbol of the divine bounty of earth.

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